कुंडली में सूर्य ग्रह के प्रतिकूल और नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए की श्लोक ऋग्वेद में भगवान सूर्य देव की स्तुति दी गई है। इसका जप करने से सूर्य ग्रह अनुकूल होकर सकारात्मक फल देता है।
श्लोक/ मंत्र
“ॐ त्वं हि न: पितं वसो त्वं माता शत क्रतो बभूविथ अधा ते सुम्नमीमहे”
इस मंत्रअर्थ:
ॐ – यह संपूर्ण ब्रह्मांड के उत्पत्ति और संहार का प्रतीक है।
त्वं हि न: पितं वसो – तुम हमारे पिता हो, और तुम ही हमारे घर के स्वामी (वसो) हो।
त्वं माता शत क्रतो – तुम हमारी माता हो, और तुम्हारे पास शत क्रत (शक्तिशाली कृत्य) हैं।
बभूविथ अधा ते सुम्नमीमहे – तुमने हमें दयालुता और आशीर्वाद से भरा है, हम तुम्हारी स्तुति करते हैं।
अर्थात
यह श्लोक व्यक्ति के जीवन में सूर्य देवता के महत्व को दर्शाता है। यहां सूर्य देवता को पिता और माता के रूप में सम्मानित किया गया है, क्योंकि वे जीवन के लिए आवश्यक ऊर्जा और जीवनदायिनी शक्ति प्रदान करते हैं।
सूर्य देव को संसार के पालनकर्ता के रूप में पूजा जाता है, जो हमारे जीवन में निरंतर ऊर्जा और प्रेरणा का स्रोत होते हैं। साथ ही, यह श्लोक यह भी कहता है कि हम सूर्य देव की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उनकी स्तुति करते हैं, ताकि हमारा जीवन समृद्ध और मंगलमय हो।
निष्कर्ष:
यह श्लोक सूर्य देवता के प्रति आदर और भक्ति को व्यक्त करता है, साथ ही यह भी बताता है कि सूर्य की कृपा से ही जीवन में शक्ति, उर्जा, और समृद्धि आती है। यह हमारे दैनिक जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शक्ति का संचार करता है।

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