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श्रीकृष्ण
हरि तो सों तेरे निकट, तू पुनि फिरत उदास । मृग कस्तूरी नाभि में, फिर फिर ढूँढै घास ।। अर्थात, परमात्मा (हरि) तुम्हारे बहुत पास यानी तुम्हारे भीतर ही हैं,…
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तुलसी पत्ते की महिमा
भागवत पुराण को ध्यान से देखने पर पता चलता है कि नारद द्वारा श्रीकृष्ण को दान में माँगने और तुलसी-पत्र से तराजू बराबर होने की कथा वहाँ सीधे रूप में…



